सींगरी पुनर्जीवन अभियान के नाम पर जिला प्रशासन करवा रहा अवैध उत्खनन
प्रदेश वॉच नरसिहपुर - बबलू कहार
नियमो को ताक पर रखकर नरसिंगपुर नगर में सींगरी नदी को पुनर्जीवित करने का नाटक किया जा रहा है और इस नाटक के निर्देशक है जिले के कलेक्टर जेसीबी और डंपरों से खनन प्रतिबंधित होने एवं डंपरों मशीनों के खनन में पाए जाने पर राजसात करने के प्रदेश सरकार के आदेश के बाद नरसिंगपुर कलेक्टर ने सारे आदेशों को ताक पर रखकर खनन माफियाओं के इशारे पर इस पुरे अभियान की रुपरेखा तैयार की और एक ही दिन में सारी प्रतिबंधित मशीने सींगरी में उतार दी गयी डम्पर जेसीबी पोकलैंड सारी मशीनरी सींगरी के खनन में लग गयी क्या प्रदेश सरकार के आदेश के वाबजूद मशीनों और डंपरों से खनन करवाना उचित है...अब कहा ये जा रहा है कि सब जनसहयोग से हो रहा है ठेकेदार अपनी मशीने लगाकर सेवा कर रहे है तो साहब एक बार नरसिंहपुर नगर के बेध और अबैध कालोनियों का चक्कर लगा आइये आपको सारा खेल समझ आ जायेगा नरसिंहपुर की जनता को मुर्ख बनाया जा रहा है सींगरी में सिर्फ जहाँ पर मट्टी है वहीँ इनका अभियान चल रहा है जहाँ वास्तव में सफाई की जरुरत है वहाँ नहीं नरसिंहपुर की जनता चुप नहीं बैठेगी जिले भर में समाज सेवा के नाम पर जो अवेध कारोबारियो से मिलकर प्रशासन कर रहा है स्पष्ट करे किस नियम के तहत नदी में खनन कराया जा रहा है कालोंनायजरो को लाभ पहुचाने जनता के साथ धोखा किया जा रहा है कहाँ कितनी खुदाई करनी है कोई बंधन नहीं बारिश आने के पहले जितनी मिट्टी खोद सको खोद लो, ..शर्म की बात तो यह की लोग सींगरी को माँ कहकर उसकी ही अस्मत लुटवाने में लगे है और वाह वाही लूट रहे हैं।
सींगरी अभियान में वाहवाही।
नही दिख रहा अवैध उत्खनन।
एक एक कालोनी में लाखों रुपये की मिट्टी जा रही हैं इस प्रकार प्रशासन को करोड़ों की राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
इसके पहले जिले में मिट्टी उत्खनन एवं परिवहन पर ठोस कार्यवाहियां करवाई जा रही थीं ...जिसके चलते ठेकेदारों एवं कॉलोनाइजर्स को फायदा पहुंचाने हेतु यह अभियान रचा गया।
सिंगरी अभियान में जहाँ मिट्टी है .वहाँ मशीने,ट्रेक्टर,एवं डम्फर ठेकेदार एवं प्रशासन का अभियान दिख रहा है।अन्य स्थानों पर जहाँ मिट्टी खोदने के स्थान नही है वहाँ की गंदगी किसी को दिखाई नही देती।
इसके अलावा जिले में अन्य स्थानों पर लगे सैंकड़ों डम्फर रेत जो कि मलाह पिपरिया के आस पास प्रचुर मात्रा मे देखी जा सकती है।जो की प्रशासन की मिलीभगत से धड़ल्ले से जारी है ।देर राज हाइवे हो या शहर की सड़कें तेज रफ्तार दौड़ते डंफरों को जिला प्रशासन एवं राजनैतिज्ञों का आशीर्वाद प्राप्त है।जिससे वह बेखोफ नियमों का उलंघन कर सकते हैं।हां सारे नियम कानून तो सिर्फ गरीब आदमी के लिए बनाए गए हैं जिले के हालातों को देखकर प्रतीत हो रहा है कि जिला प्रशासन के ईमान के ऊपर नोटों की गड्डियां भारी पड़ रही हैं।तभी तो खनिज विभाग के दफ्तर में अक्शर खनन माफिया के धुरंधर कोल्ड्रिंक्स का लुफ्त उठाते देते जा सकते हैं। खनन माफियाओं की आवभगत के अलावा खनिज विभाग को कोई कार्य नही है।और उस पर अब सिंगरी अभियान में वाहवाही।लूटने बाला जिला प्रशासन अवैध उत्खनन के आरोपों से दो चार हो रहा है नाटकीय रूप से सुनियोजित तरीके से किया जाने वाला सिंगरी अभियान अब कॉलोनाइजर्स एवं ठेकेदारों को फायदा पहुचाने का सडयंत्र माना जा रहा है।और अब जब बारिस प्रारम्भ होने बाली है तो जल्द से जल्द निर्माणाधीन कालोनियों में मिट्टी की पूर्ति के प्रयास किये जा रहे हैं।ताकि बरसात आते ही अभियान और प्रशासन दोनो को आराम मिल सके।
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